Dil ki Baat
" नारी " शब्द है ये नारी ऐसा जिसमे सब कुछ अपने में ही है समेटा , चाहे हो " माँ " या हो चाहे "बेटी " हर किरदार में है ये जान डाल देती। कभी "बहन" बनकर प्यार पाया है तो , कभी दादी बनकर पोते पोतियों को खिलाया है , आसान नहीं एक नारी होना , हर बार खुद से ही खुद के लिए लड़ना। सम्मान है हर नारी का अधिकार , क्यूंकि नारी ने ही जोड़ा है इस मानव समाज को देकर प्यार , कभी भी इसकी आँखों में आँशु लाना नहीं , आ भी जाये तो प्यार भी दिखाना वहीं। हर रूप में स्वीकार करना इसे , कभी गृहणी बन कर स्वादिस्ट भोजन कराएगी तुम्हे , तो कभी कामकाज़ी नारी बनकर , घर के ख़र्चों में हाथ बंटा कर थोड़ी राहत दिलाएगी तुम्हे। भटक जाओ अगर कभी कहीं , घबराना नहीं ,भगवान के रूप में हमेशा राह दिखाएगी तुम्हे। अज्ञात