Poetry of the year 2021
खुद से
ऐसे जो तुम भागोगे खुद से ,
कैसे मुश्किलों का सामना कर पाओगे ,
बेहतर होगा समझ जाओ तुम ,
खुद से भागकर ,खुद ही , खुद तक ,
बापिस आओगे तुम।
माना ये जीवन जीना आसान नहीं ,
उतार -चढ़ाव , हसना -रोना ,
ये सब भी तो जीवन का हिस्सा हैं ,
इनके बिना जीवन जैसेकि
रंगों के बिना होली ,फूलों के बिना बसंत हो ,
बेहतर होगा समझ जाओ तुम ,
वरना खुद से भागकर ,खुद ही , खुद तक ,
बापिस आओगे तुम।
कुछ पल मुश्किल के होंगे ,
मगर उनको जी कर जब खुशियाँ पाओगे तुम ,
उन पलों की अहमियत जान जाओगे तुम ,
वख्त है अभी भी ,गुज़रा नहीं ,
बेहतर होगा समझ जाओ तुम ,
वरना खुद से भागकर ,खुद ही , खुद तक ,
बापिस आओगे तुम।
भावना
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