Dil ki Baat
" नारी "
शब्द है ये नारी ऐसा
जिसमे सब कुछ अपने में ही है समेटा ,
चाहे हो " माँ " या हो चाहे "बेटी "
हर किरदार में है ये जान डाल देती।
कभी "बहन" बनकर प्यार पाया है तो ,
कभी दादी बनकर पोते पोतियों को खिलाया है ,
आसान नहीं एक नारी होना ,
हर बार खुद से ही खुद के लिए लड़ना।
सम्मान है हर नारी का अधिकार ,
क्यूंकि नारी ने ही जोड़ा है
इस मानव समाज को देकर प्यार ,
कभी भी इसकी आँखों में आँशु लाना नहीं ,
आ भी जाये तो प्यार भी दिखाना वहीं।
हर रूप में स्वीकार करना इसे ,
कभी गृहणी बन कर स्वादिस्ट भोजन कराएगी तुम्हे ,
तो कभी कामकाज़ी नारी बनकर ,
घर के ख़र्चों में हाथ बंटा कर थोड़ी राहत दिलाएगी तुम्हे।
भटक जाओ अगर कभी कहीं ,
घबराना नहीं ,भगवान के रूप में हमेशा राह दिखाएगी तुम्हे।
अज्ञात
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