क़ाश
काश कोई तो होता जो पूछता हमसे ,
तुम ठीक तो हो ना ,
तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं।
कोई पूछता हमसे तो बता देते ,
बहुत बीमार सा हूँ ,
दुनिया की इस शतरंज में ,
हारा सा बैठा हूँ।
दुनिया बहुत बड़ी है जनाब ,
यहाँ सब अपने तो है ,
पर कोई अपना सा नहीं ,
यहाँ तो वख्त से पहले इंसान ,
बदल जाया करते हैं।
काश कोई तो होता जो पूछता हमसे ,
तुम ठीक तो हो ना ,
तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं।
नेहा
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