Poetry
ठिकाना
जो तुम उसे ढूंढ़ने जाओगे कभी ,
मैं तुम्हें ये बता दूँ ,
वो वहाँ नहीं रहती अब ,
जहाँ पहले रहा करती थी।
उसके आँगन के वो फूल
अब मुरझाये से पड़े हैं ,
वो पंछी आज भी चहचहाते तो हैं ,
मगर तुम्हें मैं ये बता दूँ ,
उनको सुनकर खुश होने वाली ,
वो वहाँ नहीं रहती अब ,'
जहाँ पहले रहा करती थी।
लगता है ठिकाना कोई और ,
ढूंढ लिया है उसने ,
उसकी मजूदगी में एक जादू सा है ,
कभी मिलोगे उससे तो जान जाओगे तुम ,
फ़िलहाल तुम्हें बता दूँ ,
वो वहाँ नहीं रहती अब।
भावना
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