मैँ 

कुछ लिखते लिखते रह जाती हूँ ,
कुछ बोलते बोलते चुप हो जाती हूँ ,
एक पहेली सी बन गयी हूँ ,
कभी सुलझ तो कभी उलझी सी रह जाती हूँ। 
               भावना 

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