मैँ कुछ लिखते लिखते रह जाती हूँ ,कुछ बोलते बोलते चुप हो जाती हूँ ,एक पहेली सी बन गयी हूँ ,कभी सुलझ तो कभी उलझी सी रह जाती हूँ। भावना
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