29/Jul/2020
एक किस्सा
'कुछ ' नहीं "बहुत कुछ " लिखना चाहता हूँ मैं ,
इस अधूरी सी मोहब्बत को मुक़्क़मल ,
करना चाहता हूँ मैं।
इस अकेलेपन में भी बस तुझे पाना चाहता हूँ मैं ,
सच कहुँ तो थक सा गया हूँ ,
ये अधूरी मोहब्बत की दास्ताँ लिखते लिखते ,
एक आखिरी किस्सा पूरी मोहब्बत का भी ,
लिखना चाहता हूँ मैं।
भावना
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