28/Jul/2020
तुम
समझ न पाया आज तक मैं खुद को ,
लेकिन ये सच है तुम्हें समझता था मैं ,
जब जब सोचता हूँ तेरे बारे में ,
ये भी सच है , बस हँसता हूँ मैं।
खुद से वफ़ा न हो पायी आज तक ,
लेकिन हाँ सिर्फ़ तेरे लिए वफादार था मैं ,
कुछ उलझने आज तक नहीं सुलझ पायी ,
कहना तो बहुत कुछ था मुझे ,
मगर अब चुप सा रहने लगा हूँ मैं।
वो पल बहुत हसीन थे ,
तेरा रूठना मेरा मनाना ,
तेरा हर बात पर नख़रे दिखाना ,
भुला नहीं मैं आजतक ,
बस तेरा एहसास सा होने लगता है मुझे ,
बस तुझे आज भी याद करता हूँ मैं।
भावना
Comments
Post a Comment