Bhavna Feelings

                                                इज़हार 

काश ये इज़हार करना आसान होता 
मैं   लब  खोलती और 
तुझे  मेरी बातों  का  अहसास होता 
कहने को तो मैं हज़ार बार कह देती 
काश तुझे भी मुझसे प्यार बेशूमार  होता 

मैं तो तुझे बंद आँखों से भी 
अपने साथ पाती हूँ 
काश तू हकीकत में भी मेरे साथ होता। 
ना जाने कब समझा पाऊँगी मैं तुझे 
हाँ कितना अच्छा  होता 
काश अगर तू खुद समझदार होता 

मेरे  होने  से तू भी खुश होता 
मुझे सुनने के लिए तू भी चुप होता 
बस इतना सा कहना  था मुझे 
बस यही  इज़हार था मेरा। 
कि तुझे पाना तो चाहती हूँ मैं 
मगर काश तुझे भी  मुझे पाने का जुनून  होता। 
                                                                                                       भावना 

Comments

Popular Posts