My Dreams
क्या अगर
ये जो पँख लगाए हैं मैंने ,
ख्वाहिसों के खुद को
क्या होगा अगर ये
टूट गए एक दिन
ये जो आग है मेरे अंदर
सपनों को जीने की
क्या होगा अगर ये
बुझ गई एक दिन
क्या होगा ये तो नहीं जानती मैं
पर साँसे चलेंगी
मगर जीना भूल जाउंगी
कदम तो उठाउंगी
लेकिन रास्ता भटक जाउंगी
कोशिश करूंगी ऐसे ही
उड़ती रहूँ मैं ,
मेरे सीने की आग हमेशा
जलती रहे ,
वरना इस दुनिया के किसी कोने में
हर दिन खुद को मरता हुआ पाऊँगी।
भावना
ये जो पँख लगाए हैं मैंने ,
ख्वाहिसों के खुद को
क्या होगा अगर ये
टूट गए एक दिन
ये जो आग है मेरे अंदर
सपनों को जीने की
क्या होगा अगर ये
बुझ गई एक दिन
क्या होगा ये तो नहीं जानती मैं
पर साँसे चलेंगी
मगर जीना भूल जाउंगी
कदम तो उठाउंगी
लेकिन रास्ता भटक जाउंगी
कोशिश करूंगी ऐसे ही
उड़ती रहूँ मैं ,
मेरे सीने की आग हमेशा
जलती रहे ,
वरना इस दुनिया के किसी कोने में
हर दिन खुद को मरता हुआ पाऊँगी।
भावना
Comments
Post a Comment